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सब्जियों के बढ़ते दाम पर ममता का ‘मटन वाला’ लॉजिक, कहा- महंगाई के पीछे साजिश   

सर्मिष्ठा नाग-कोलकाता                                                                                                                                                    सब्जियों के बढ़ते दाम पर ममता का ‘मटन वाला’ लॉजिक, कहा- महंगाई के पीछे साजिश                                                          पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सब्जियों के बढ़ते दामों को लेकर नाराजगी जताई. उन्होंने इसके लिए केंद्र की मोदी सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए कीमतों पर नियंत्रण रखने में पूरी तरह विफल होने का आरोप लगाया. ममता बनर्जी ने मंगलवार को राज्य के मंत्रियों और अधिकारियों के साथ बैठक की. और 10 दिनों में सब्जियों के दाम कम करने का अल्टीमेटम दिया. उन्होंने आरोप लगाया कि एक वर्ग के लोग अधिक मुनाफा कमाने के लिए सब्जियों को फ्रीजर में रख देते हैं और आम जनता को इसका खामियाज़ा भुगतना पड़ता है. मुख्यमंत्री ने इसके लिए दोषी लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने को भी कहा है. बैठक के दौरान ममता ने कहा, “आलू किसानों को प्रति किलो 15 रुपये से ज्यादा नहीं मिलता. लेकिन बाजार में इसे 35 से 40 टका में बेचा जा रहा है.” ममता ने पुलिस से बाजारों में रेड करने को कहा. साथ ही महंगाई को नियंत्रित करने के लिए गठित राज्य टास्क फोर्स को भी तुरंत बाजारों का दौरा करने और सब्जियों की कीमतों पर नज़र रखने के निर्देश दिए. ममता बनर्जी ने कहा कि कुछ लोगों के द्वारा अधिक मुनाफ़े के चक्कर में कृत्रिम मांग पैदा की जा रही है. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि आलू, प्याज, लहसुन, बैंगन, लौकी और खीरे की कीमतें पिछले साल की तुलना में तेजी से बढ़ी हैं. बैठक में मौजूद अधिकारियों, व्यापारियों और अन्य हितधारकों से बनर्जी ने कहा, “मानसून आ गया है, लेकिन सब्जियों की कीमतें अभी भी आसमान छू रही हैं. लोग बाजार जाने से डर रहे हैं. हम इस स्थिति को लेकर बहुत चिंतित हैं.”
ममता ने अधिकारियों से सवाल किया कि अभी भी हमारे कोल्ड स्टोरेज में आलू की 45 लाख मीट्रिक टन क्षमता में से 30 लाख मीट्रिक टन आलू जमा हैं. जब सब्जियों के दाम आसमान छू रहे हैं, तो हमारे स्टोरेज में इतनी बड़ी मात्रा में आलू क्यों पड़ा हुआ है? इसके बाद मुख्यमंत्री ने उदाहरण देते हुए कहा, ‘अगर मुर्गियां बीमार होती हैं तो उन्हें मार दिया जाता है.’ नतीजा ये होता है कि लोग डर के मारे चिकन नहीं खाते हैं. फिर बकरों की कीमत बढ़ जाती है. यह सब बड़े सर्किलों में काम करता है. आंख से दिखाई नहीं देता. ममता ने अधिकारियों से कहा कि कई लाख मीट्रिक टन आलू कोल्ड स्टोरेज में पड़ा है. बाज़ार को थोड़ा-थोड़ा करके जारी करें.

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